शनिवार, 16 जनवरी 2010

विबग्योर बिखराए प्रेम का यह प्रिज्म


छंदबद्ध, लयबद्ध व तुकान्त कविताओं के लिए मेरे मन में बहुत आदर का भाव है किन्तु जबरदस्ती की तुकमिलावन और त्वरित तुकबन्दी को पढ़ने - गढ़ने के लिए मेरे पास न तो समय है और न जगह। आज यूँ ही फरमाइश पर कुछ लिख रहा था और जब उसका पहला ड्राफ़्ट घर में सुनाया तो हाय - हाय मच गई। सुझाव पर सुझाव कि तुम तो वही लिखो जो तुम्हें लिखना आता है , यह सब तुक - वुक बिल्कुल नहीं सुहाता है। मैं ने कहा क्या करूँ कभी - कभी चुनौती के रूप में लिया गया काम गले पड़ जाता है और अच्छा भला आदमी 'कबी जी' बन जाता है। आज सर्दी चरम पर है। अपनी तो हालत यह है कि रजाई में तसव्वुरे जानां किए औंधे पड़े हैं और मूँगफलियों पर प्यार उमड़ रहा है। आज बच्चों ने भी स्कूल से बंक मार ली किन्तु कोई है जो इस भयंकर ठंड में भी पूरे कुनबे के लिए कुछ न कुछ किए जा रहा है। उसे कभी तीन शब्दों से बना वह छोटा - सा वाक्य नहीं कहा जो पिछली शताब्दी में इस पृथ्वी पर शायद सबसे अधिक बार बोला गया होगा। हिन्दी ब्लाग की बनती हुई दुनिया तरह - तरह की चीजें सामने ला रही हैं। एक बनते हुए संसार में हम सब अपने - अपने स्तर पर योगदान कर रहे हैं और अभिव्यक्ति के भंडार को भर रहे हैं। पता नही मेरी यह अभिव्यक्ति कैसी है! किन्तु पूरा यकीन दिलाता हूँ कि इसमें जबरदस्ती की तुकमिलावन और त्वरित तुकबन्दी तो बिल्कुल नहीं है। यह वही चीज है जिसे मैं अपनी भाषा की तमीज में 'ब्लाग कविता' कहता हूँ। तो आइए देखिए , पढ़िए यह ब्लाग कविता आई मीन एक सीरियस ब्लाग कविता :


लिरिकल रिफ़्लेक्शंस

तू मेरी पेचकस मैं अदना सा स्क्रू
आई लव आई लव आई लव यू।

करती नहीं तुम कभी भी इफ़ आर बट
वैसे हममें भी अक्सर होती है झंझट
अपना यह घर जैसे कोई वर्कशाप है
बच्चे हमारे हैं ये छोटे- छोटे नट ।

विबग्योर बिखराए प्रेम का यह प्रिज्म
बनी रहे दुनिया यह गुड नाइस न्यू।
आई लव आई लव आई लव यू।
**
दुनिया में हर तरह का राग है खटराग भी
बुरी - बुरी साइट्स इसमें अच्छे - अच्छे ब्लाग भी
इसमें ही हँसना है रोना भी इसमें ही
इसमें ही खोजना है जल भी और आग भी।

बात थी मजाक की सीरियस - सी हो गई
चलती रहे गड्डी फारवर्ड एन्ड थ्रू।
आई लव आई लव आई लव यू।

तू मेरी पेचकस मैं अदना सा स्क्रू
आई लव आई लव आई लव यू।
-------
चित्र परिचय : कोई भी मौसम हो ये कबूतर अपने घर पास की दुकान के पास बिजली के तार पर यूँ ही बैठते हैं , अक्सर लम्बी और ऊँची उड़ान के बाद। उन्हें भी तीन शब्दों वाला वही वाक्य !

15 टिप्‍पणियां:

Ek ziddi dhun ने कहा…

shandar hai ji

Ashok Pande ने कहा…

अमैं!

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

:)....चलती रहे गड्डी फारवर्ड एन्ड थ्रू।

गौतम राजरिशी ने कहा…

हा! हा! बहुत खूब सिद्धेश्वर जी...इस तुकबंदी का ये बिम्ब "विबग्योर बिखराए प्रेम का यह प्रिज्म" तो जानलेवा है सर जी।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अरे वाह...!

"दुनिया में हर तरह का राग है खटराग भी
बुरी - बुरी साइट्स इसमें अच्छे - अच्छे ब्लाग भी
इसमें ही हँसना है रोना भी इसमें ही
इसमें ही खोजना है जल भी और आग भी।"

बहुत ही बढ़िया रचना है यह तो!

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

गज़ब किया शुरु -
"तू मेरी पेचकस मैं अदना सा स्क्रू
आई लव आई लव आई लव यू।"

बेहतरीन !

Vivek Ranjan Shrivastava ने कहा…

इंद्रधनुष के सात रंगो पर बहुतों ने बहुत कुछ लिखा है , .... विबग्योर का आपका प्रयोग पसंद आया ...

सुशील कुमार छौक्कर ने कहा…

ये अलग अंदाज भी बहुत भाया जी।
विबग्योर बिखराए प्रेम का यह प्रिज्म
बनी रहे दुनिया यह गुड नाइस न्यू।
आई लव आई लव आई लव यू।

सुन्दर।

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

जानलेवा नहीं, जानदार है -
"विबग्योर बिखराए प्रेम का यह प्रिज्म!"

प्रिज़्म से गुजरने के बाद सूर्य का प्रकाश सात रंगों में बँट जाता है -

V - बैंगनी
I - आसमानी
B - नीला
G - हरा
Y - पीला
O - नारंगी
R - लाल

पारूल ने कहा…

"किन्तु कोई है जो इस भयंकर ठंड में भी पूरे कुनबे के लिए कुछ न कुछ किए जा रहा है। उसे कभी तीन शब्दों से बना वह छोटा - सा वाक्य नहीं कहा" ....भई कभी कभी कह भी देना चाहिए ...

वन्दना अवस्थी दुबे ने कहा…

वाह-वाह. बढिया है.

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

.... वाह-वाह ... वाह-वाह .... बहुत खूब !!!

एस. बी. सिंह ने कहा…

भाई तसव्वुरे जानां का यह अंदाज़ अच्छा लगा। थैंक यू, थैंक यू, थैंक यू।

Babli ने कहा…

वाह वाह बहुत बढ़िया लगा!

अजित वडनेरकर ने कहा…

क्या बात है, क्या बात है
आई लव यू आई लव यू...