मंगलवार, 22 दिसंबर 2009

वान गॉग इसे उठाकर रोप देता है अपने कैनवस पर

हालीना पोस्वियातोव्सका की बहुत सी कविताओं के अनुवाद आप पहले भी पढ़ चुके हैं। आज एक खास कविता, इसमें पोलैंड की इस महान कवयित्री का जीवन और निजी अनुभव संसार तो है ही महान चित्रकार विन्सेन्ट वान गॉग का एक चित्र * भी अपनी पूरी भव्यता व दिव्यता के साथ चमक रहा है।कविता का तो जैसा - तैसा अनुवाद कर दिया लेकिन चित्र का ! तो आइए ,पढ़ते - देखते हैं यह कविता और कलाकृति - सूरजमुखी ( अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह ):






सूरजमुखी

( हालीना पोस्वियातोव्सका की कविता और वान गॉग का एक चित्र )

प्रेम में डूबा हुआ
एक ऊँचा लंबा सूरजमुखी
हाँ यही तो है
उसके नाम का समानार्थी शब्द।

चौड़ी पत्तियों से झाँकती
अपनी हजारों खुली पुतलियों के साथ
वह उठाती है अपना आकाशोन्मुख शीश
और सूरज रूपान्तरित हो जाता है
मधुमक्खियों के एक छत्ते में।

नीली भिनभिनाहटों में
बदलने लगता है सूरजमुखी
और चहुँदिशि फैल जाती है सुनहली दीप्ति।

और फरिश्तों के
मस्तिष्क मात्र में विद्यमान वान गॉग
इसे उठाकर रोप देता है अपने कैनवस पर
और चमक बिखेरने का देता है आदेश।
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* चित्र : गूगल सर्च से साभार


2 टिप्‍पणियां:

शरद कोकास ने कहा…

विंसेंत वान गॉग का यह चित्र इस कविता मे अपने अनेक अर्थो मे मुखर हो गया है और सिद्धेश्वर जी इस बेहतरीन अनुवाद की वज़ह से ही ।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

"सुन्दर-मनभावन रहा, कविता का अनुवाद।
मिलता है नवनीत तो मन्थन के ही बाद।।"
आपके श्रम को सलाम!