शनिवार, 29 जनवरी 2011

गोया कोई तुक बे-तुक

तमाम फेसबुकिया मित्रों से क्षमा सहित और इसी दुनिया के यायावरों के  लिए आदर और प्यार के साथ एक अतुकान्त तुक.. 

फेसबुक

की-बोर्ड की काया पर
अनवरत - अहर्निश
टिक - टिक टुक- टुक।

खुलती - सी है इक दुनिया
कुछ दौड़ - भाग
कुछ थम - थम रुक- रुक।

उनींदेपन की
पटरियों पर रेंगते
किसी भाप इंजन की
छक - छक  छुक - छुक।

एक दिल है बेचारा
मुहब्बत का मारा
फिर भी
धड़कता है
धीरे - धीरे
धुक - धुक।

अपनी मौज में है
सारा संसार
इत - उत दिखता - छिपता है
दु:ख में सुख- सुख
सुख में दु:ख - दु:ख।

गोया कोई तुक बे-तुक।

8 टिप्‍पणियां:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

पर लय सच में गज़ब की है,
न खटका था कुछ।

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

वाह ..बहुत खूब... फेस बुक पर सुन्दर लिखा..वाह...

pratibha ने कहा…

ye bhi khoob rahi!

अजेय ने कहा…

बहुत सुन्दर तस्वीर है सिद्धेश्वर भाई ;-)

रवीन्द्र प्रभात ने कहा…

गज़ब की लय है सिद्धेश्वर भाई !

ana ने कहा…

बहुत सुन्दर ............ वाह

डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति ने कहा…

आज ४ फरवरी को आपकी यह सुन्दर भावमयी पोस्ट चर्चामंच पर है... आपका आभार ..कृपया वह आ कर अपने विचारों से अवगत कराएं

http://charchamanch.uchcharan.com/2011/02/blog-post.html

अविनाश वाचस्‍पति अन्‍नाभाई ने कहा…

न्‍यू मीडिया के समक्ष
सरकार
झुक झुक झक झक