गुरुवार, 6 जनवरी 2011

चॉकलेट आइसक्रीम खाती हुई गुजर रही है पामेला एंडरसन

बहुत दिनों से  यह एक छोटी - सी  कविता मेरे संग्रह में पड़ी थी। कई बार मन हुआ कि इसके अनुवाद पर काम करूँ लेकिन अक्सर ऐसा हुआ कि  एक काम को छोड़ दूसरे काम में लग गया और अवसर व अवकाश  मिलने पर इस कविता के रचनाकार न्यूजीलैंड के मशहूर कवि पीटर ओड्स की कविताओं का मूल ( भाषा)  में ही आनंद लेता रहा। कविता की जितनी भी ,जैसी भी मेरी समझ है  उसके अनुसार उनकी कविताओं में समुद्र , समुद्री तट, पुरानी बस्तियों, विलुप्त होती जगहों,खंडहर होते स्मारकों और कहीं भी , किसी भी खास आंचलिक परिवेश को रचने - गढ़ने वाली सहज स्थितियों व  बेहद मामूली - से दिखने वाले घटना - प्रसंगों के विविधवर्णी बिम्ब हैं। इसके साथ भाषा  सहजता व भंगिमा का एक साधारण , खुरदरा विन्यास प्रचुरता में है जो किसी भी कविता प्रेमी को आकर्षित करने के लिए  शायद ही कम  हो। तो , आज और अभी आइए देखते , पढ़ते हैं यह  छोटी - सी कविता :   


पीटर ओड्स  की कविता

सेंट क्लेयर बीच पर पामेला एंडरसन
( अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह )

मेरी मृत्यु की प्रतीक्षा कर हैं
जालीदार पटरियों पर बैठे हुए जलपाखी
अपनी कंचेदार आँखों से घूरते हुए
वे कामना कर रहे हैं मेरी देह की।

गोया कह रहे हैं वे
- हमें पसन्द है तुम्हारी सैंडविच
- हमें पसंद हैं तुम्हारी आँखें।

वहाँ
एक नहीं
दो नहीं
कुल दस जलपाखी
चींथ जाने को तैयार बैठे हैं मुझे ।

मैं शार्कों की राह देख रहा हूँ
मैं राह देख रहा हूँ कि कोई आए
और शुरू हो शार्क - मनुष्य की सर्फिंग रेस।

अब जबकि
मथते हुए ललछौंहे जल की ओर है
जलपाखियों की पीठ
और उनके विचारों में विचरण कर रहा है मेरा लंच
मैं साक्षी होने जा रहा हूँ
पिछले अगस्त में
समुद्री दीवार को ध्वस्त कर देने वाली सुनामी के बाद
घटित होने जा रही एक बहुत बड़ी घटना का
जो इस क्षण
अवतरित होने को तैयार है सेंट क्लेयर के तट पर।

एक भी कण बरबाद किए बगैर
मैंने उदरस्थ कर लिया है अपना सैंडविच
और पार्श्व से
चॉकलेट आइसक्रीम खाती हुई गुजर रही है पामेला एंडरसन।

3 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक" ने कहा…

वाह..!
एक सुन्दर रचना का बेहतरीन अनुवाद!
बहुत कुछ कह दिया इस रचना में रचनाकार ने!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

अहा, बस।

डॉ .अनुराग ने कहा…

दिलचस्प !!!!