मंगलवार, 15 सितंबर 2009

संवाद




- आज क्या किया ?
- काम .
- कल क्या किया था ?
- काम .
- कल क्या करना है ?
- काम.
- क्यों ?
- इसलिए कि काम न करें तो क्या करें ? काम ही कर लें.
- कैसा काम ?
- पता नहीं.
- तो फिर काम किसलिए ?
- पता नहीं.
- क्या पता नहीं ?
- काम .
- तो यह क्या कर रहे हो ?
- काम.
- ---------
- हे राम !

11 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

एक काम हम भी कर ही दें..

क्या..

टिप्पणी.

ये कोई काम है..

sidheshwer ने कहा…

- यह क्या ?

- टिप्पणी.

- कैसी ?

- काम की.

-या करें? काम?

- नहीं . धन्यवाद !

http://bhartimayank.blogspot.com ने कहा…

क्या कर रहे हो?
काम,
कैसा काम?
टिपियाने का काम,
कब तक?
थक जाने तक,
वाह..,
यही तो है काम,
बढ़िया है।।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

जो जरूरी है,
काम
जो जरूरी नही,
काम,
और आराम,
इसके लिए,
जय श्री राम।
लो हो गया,
टिप्पणी का काम।।

संजय तिवारी ’संजू’ ने कहा…

आपका हिन्दी में लिखने का प्रयास आने वाली पीढ़ी के लिए अनुकरणीय उदाहरण है. आपके इस प्रयास के लिए आप साधुवाद के हकदार हैं.

संगीता पुरी ने कहा…

अच्‍छा कहा !!

डॉ .अनुराग ने कहा…

उथली दुनिया में कित्ता काम है जी ....

chirantan ने कहा…

हाय राम!
सुबह-शाम
बस एक ही नाम
काम और केवल काम।

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

हे राम !
लिया नाम
क्या है यह ?
काम !
राम-राम !
राम-नाम काम ?
सब कुछ बेकाम !

शरद कोकास ने कहा…

सिद्धेश्वर जी यह काम सही किया आपने -शरद

भूतनाथ ने कहा…

बाप रे बाप.....काम ही काम....और जिंदगी तमाम....हे राम.....आपको भी सलाम....लिखने वाले को भी प्यार का पैगाम....!!