गुरुवार, 29 जनवरी 2009

वे हमेशा सिर पर सवार रहती हैं

टोपियां खुश हैं
कि वे सिर पर सवार हैं
टोपियां खुश हैं
कि सबसे ऊंची है उनकी जगह
टोपियां खुश हैं
कि उनके नीचे दबा हुआ है दिमाग
टोपियां खुश हैं
कि उनकी छत्रछाया में पनप रहा है ज्ञान -विज्ञान

टोपियां खुश हैं
कि उनकी छाया में सूख रही हैं तमाम जरूरी चीजें
टोपियां खुश हैं
कि उनके ऊपर कुछ भी नहीं है
टोपियां खुश हैं
कि उनके नीचे सबकुछ है विद्यमान .

टोपियां समझदार हैं
वे आपस में संवाद नहीं करती हैं
टोपियां समझदार हैं
वे आपस में करती हैं सिर्फ़ वाद और विवाद
टोपियां समझदार हैं
वे जब चाहें बदल लेती हैं आपस में सिर
टोपियां समझदार हैं
वे हमेशा सिर पर सवार रहती हैं.
टोपियां खुश हैं कि वे टोपियां हैं
टोपियां खुश हैं
कि चाहे जिस ओर भी रहें
वे बड़ी समझदारी से
तलाश लेती हैं अपने लिए एक अदद सिर।

9 टिप्‍पणियां:

महेन ने कहा…

सच्ची... टोपी ही हो जाना चाहिए.

डॉ .अनुराग ने कहा…

कैसे लाये ये ख्याल ? काबिले तारीफ है ये सोच ओर उसे दिए गए शब्द ......ओर संदेश भी

शिरीष कुमार मौर्य ने कहा…

क्या बात है चच्चा ! बहुत ही अच्छी कविता!

शारदा अरोरा ने कहा…

बहुत मजा आया पढ़ कर , कैसे कैसे इतरा लेती हैं टोपिआं |

Manish Kumar ने कहा…

टोपियां समझदार हैं
वे आपस में करती हैं सिर्फ़ वाद और विवाद
टोपियां समझदार हैं
वे जब चाहें बदल लेती हैं आपस में सिर

हम्म बड़े पते की बात कही आपने !

विनीता यशस्वी ने कहा…

टोपियां समझदार हैं
वे आपस में संवाद नहीं करती हैं
टोपियां समझदार हैं
वे आपस में करती हैं सिर्फ़ वाद और विवाद
टोपियां समझदार हैं
वे जब चाहें बदल लेती हैं आपस में सिर

bahut hi achhi kavita

एस. बी. सिंह ने कहा…

आज टोपी उछालने की खूब सूझी............. अच्छी कविता

Ashok Pande ने कहा…

पुराना मटेरियल मगर आज भी उत्ता ही असरकारी. शुक्रिया साहेब!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

गंजापन ढकने को टोपी, मेरे सिर पर रहती है।
ठिठुरन से रक्षा करती हूँ , बार-बार यह कहती है।।