सोमवार, 17 नवंबर 2008

कौसानी में सुबह : दो शब्द चित्र

पिछले चार - पाँच दिन यात्रा और उत्सव में निवेश हुए - इन्हें 'व्यतीत' कहने का मन नहीं कर रहा है.सबको पता है कि आजकल बाजार मंदा चल रहा है - उतार की ओर. लेकिन इस निवेश में अभी तक कोई घाटा नहीं लग रहा है, सोच - समझ की माटी की उर्वरा तनिक उदित - सी हुई है.प्रकॄति के सुकुमार कवि कहे जाने वाले सुमित्रानंदन की जन्मस्थली कौसानी ( जिला - बागेश्वर , उत्तराखंड) में १४ , १५ और १६ नवम्बर २००८ को संपन्न 'पंत -शैलेश स्मॄति' नामक इस त्रिदिवसीय अयोजन में जो कुछ हुआ उसकी रपट जल्द ही यहाँ दिखाई देगी किन्तु मैंने इसी दौरान वहीं 'कौसानी में सुबह' शीर्षक से एक कविता लिखी जिसके पाँच हिस्से हैं. 'कर्मनाशा' के पाठकों के लिए प्रस्तुत हैं इसके केवल दो टुकड़े -

१.

मुँह अंधेरे
कमरे से बाहर हूँ पंडाल में
यहीं , कल यहीं जारी था जलसा.
अभी तो -
सोया है मंच
माइक खामोश
कुर्सियां बेतरतीब - बेमकसद...
तुम्हारी याद से गुनगुना गया है शरीर.

उग रहा है
सूर्य के उगने का उजास
मंद पड़ता जा रहा है
बिजली के लट्टुओं का जादुई खेल
ठंड को क्यों दोष दूं
भले - से लग रहे हैं
उसके नर्म , नुकीले , नन्हें तीर !

२.

कैसे - कैसे
करिश्माई कारनामे
कर जाता है एक अकेला सूर्य....
किरणों ने कुरेद दिए हैं शिखर
बर्फ के बीच से
बिखर कर
आसमान की तलहटी में उतरा आई है बेहिसाब आग.

कवि होता तो कहता -
सोना - स्वर्ण - कंचन - हेम...
और भी न जाने कितने बहुमूल्य धातुई पर्याय
पर क्या करूं -
तुम्हारे एकान्त के
स्वर्ण - सरोवर में सद्यस्नात
मैं आदिम -अकिंचन...निस्पॄह..निश्शब्द..
क्या इसी तरह का
क्या ऐसा ही
रहस्यमय रोशनी का - सा होता है राग !

10 टिप्‍पणियां:

vijay gaur/विजय गौड़ ने कहा…

कौसानी की एक सुबह का चित्र तो आज ही निरंजन सुयाल ने भी सुनाया फ़ोन पर- मौजूद थे कई मित्र कौसानी में।

अनुपम अग्रवाल ने कहा…

इस प्राकृतिक सुन्दरता का नही है कोई सानी ,
इसीलिए नाम इसका रखा गया है कौसानी ..

savita verma ने कहा…

pahad ki subah anokhi hoti hai.

Ashok Pande ने कहा…

भई वाह साहब!

Parul ने कहा…

KAUSANI GAYE 10 VARSH BEETEY/VAHAN KAA SURYODAY PHEEKA PADNEY VALA NAHI KABHI ZEHEN ME/PANKTIYAAN SUNDAR ...

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

वाह वाह और वाह..इससे अधिक कुछ कहा नही जा सकता....!

मीत ने कहा…

वाह साहब. क्या बात है ... सुंदर रचनाएं.

Manish Kumar ने कहा…

सुंदर, अति सुंदर

महेन ने कहा…

कौसानी का असर साफ दिख रहा है भई। बहुत खूब।

बेनामी ने कहा…

kausani is really wondefull and heaven of kumaoun, I love this place too much....too much .