सोमवार, 12 जुलाई 2010

ब्लागिंग की बनती दुनिया में बड़े - बड़े लिक्खाड़ पड़े हैं


यह शुद्ध मौज है। एक घरेलू मस्ती। चार दीवारों और एक छत के नीचे ऊष्मा बिखेरती एक आम चुहल। इसी चुहल से बनी रहती है घर के बीच चहल - पहल। अंचल जी ( क्लास फ़ोर्थ - बी) ने कल शाम को जब आम का चित्र बनाया और उसके नीचे पोएम लिखने की बात कही तो ..कुछ हमने कही ..; कुछ उसने कही .. और मिल - मिलाकर पोएम बन ही गई। आज अभी जब शाम हो रही है , अंचल जी अपना होमवर्क कर रहे हैं, बिटिया नींद का आनंद ले रही है , शैल हल्की फुल्की झपकी के बाद अंचल जी का होमवर्क चेक कर रही  हैं और अपन कंप्यूटर जी पर खटर - पटर कर रहा हूँ तो मन हुआ कि कुछ तुक मिला  लिया जाय। तो , मिले तुक मेरा तुम्हारा..आइए देखें आम और अमरूद के साथ एक आनलाइन आशुकविता या कवितानुमा कविता  का नज्जारा...




आम और अमरूद के बहाने...

अंचल जी ने चित्र बनाया
एक अमरूद और एक आम
बीच में लिख दी कविता छोटी
यह तो हो गया अच्छा काम।

कंप्यूटर पर करता रहता
मैं तो खटर - पटर अविराम।
थोड़ा लिखता ज्यादा पढ़ता
मचता अंतर में कोहराम।

पर क्या बच्चों की खातिर भी
लिखता हूँ कोई अच्छी चीज?
सोच सोचकर मन झुँझलाता
खुद पर आती अक्सर खीज।

पर अब यह सोचा है मैंने
लिखना है बच्चों की खातिर।
उनसे ही जग में रौनक है
वर्ना तो यह दुनिया शातिर।

अंचल जी की फल महिमा ने
भीतर के कवि को उकसाया ।
तभी तो मैंने आज प्रेम से
तुक से तुक को है भिड़वाया।

कविता क्या है मैं क्या जानूँ!
बच्चों में कविता दिखती है।
बस इसलिए लेखनी अक्सर
अपने घर पर कुछ लिखती है।

ब्लागिंग की बनती  दुनिया में
बड़े - बड़े लिक्खाड़ पड़े हैं।
हम तो हल्का - फुल्का लिखकर
कोने में चुपचाप खड़े हैं।

6 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बच्चों की कविता लिखी, दिये गहन उपदेश!
कला साधकों के लिए, भरे हुए सन्देश!!
--
बहुत ही वढ़िया बाल कविता की रचना की है आपने!
--
बधाई..हृदय से...!

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत अच्‍छी रचना !!

Rangnath Singh ने कहा…

इतनी 'मासूम' बाल कविता...मैंने नहीं पढ़ी :-)

naveen kumar naithani ने कहा…

कविता क्या है मैं क्या जानूँ!
बच्चों में कविता दिखती है।


बहुत सुन्दर बात कही है

abcd ने कहा…

अच्छी और सच्ची...
बिना कोई माथा-पच्ची /
जिस्के समझ ना आये
वो दाल खाये कच्ची /
......................................................
भाई साब,एक पुरानी चर्चा याद आ गयी...बहुत सुन्दर बाल कविता लिखी गई किसी बन्गाली बाशिन्दी के ब्लोग पे लेकिन
अप्ना पाव भर चिन्दीचोर दिमाग बोला कि ये "बाल कविता" कतई नही है...ये तो बडो के लिये कविता है -बचपन के बारे मे /एक बच्चा इसका पुरा आनन्द नही ले पायेगा /

अन्चल भाई के फ़ोटु पे जो कविता है वो जरूर बाल कविता है /
(हालन्कि आप्ने इसे "बाल कविता" कही नही कहा है,लेकिन अप्नी विश्लेशातमक्ता का दम्भ पोशित कर्ने हेतु मैने पाव भर ग्यान बघार दिया है /आखिर अपन भी तो झन्नाट लिक्खाड़ है !! :-))

hem pandey ने कहा…

कविता क्या है मैं क्या जानूँ!
बच्चों में कविता दिखती है।

-सुन्दर.