रविवार, 21 फ़रवरी 2010

जोगीड़ा सारा रारा ...


लीं साहेब 'सुरु' हो गयल फ़गुआ ...
गाईं , बजाईं चाहे खाली सुनीं आ राग ताल पर माथा धूनीं ॥
फगुआ त ह..

यह होली गीत या फगुआ भोजपुरी इलाके में कई रूपों में ( कुछ शब्दों के हेरफेर के साथ ) मिलता है लेकिन इसमें उल्लास और मस्ती सब जगह एक जैसी ही पाई जाती है। आज होलिका दहन या सम्मत (सम्मथ बाबा ) जलाने की बारी है. बचपन में हमलोग लौकार (मशाल ) बनाकर उसे भाँजते हुए इस जुलूस में शामिल होते थे- गोइंठा (उपले ) और उबटन की उतरन के साथ. हाँ , तब हम लोग होली पर पटाखे छोड़ते -फोड़ते थे दीवाली पर नहीं. यह सब स्मॄतियों के गलियारे में उतरने का उपक्रम है और विस्तार से लिखे जाने की माँग करता है. अभी तो अबीर - गुलाल वाली होली और जोगीड़ा सारा रारा का मौसम है सो कोई सीरियस बात नहीं बस मस्ती और मस्ती...

अभी आप जो कुछ भी सुनने जा रहे हैं उसमें मेरा कुछ नहीं है , यह लोक की थाती है - शताब्दियों से चली आ रही जिसके एक अणु मात्र से भी छोटे हिस्से के रूप में खुद को संबद्ध देखकर इतराने का मन करता है. ब्लाग पर तरह- तरह की दुनियायें खुली हैं - खुल रही हैं जो संगीत को सधे तरीके से प्रस्तुत करने के पुण्य कर्म में लगी हुई है.इन्ही में से एक ठिकाना है - 'इंडियन रागा' . यह गीत और चित्र वहीं से आभार सहित !



5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

आनन्द आ गया सुन कर.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

गुलाल वाली होली और जोगीड़ा सारा रारा का मौसम है सो कोई सीरियस बात नहीं बस मस्ती और मस्ती...

होली के मौसम में यह गीत सुनकर
मन मस्ती और आनन्द से भर उठा!

हिमांशु । Himanshu ने कहा…

अत्यन्त सुन्दर इस होली गीत की प्रस्तुति का आभार । इंडियन रागा का पता भी मिल गया मुझे !
आभार ।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

holi ke rang bikhren bloggers ke bich, apnatva ka ho rang....jogiraa ararara

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

Download kar liya... holi par ghar jaungi to Amma ko sunaungi :)