शुक्रवार, 29 मई 2009

गरीब रथ : चार अनुभव शब्द चित्र


गर्मियों के दिन हैं -लू , आँधी , अंधड़ , बवंडर वाले. सड़कों के किनारे लगे तरु - विटप -वृक्षों की कतार के बीच धूप में सीझते हुए गुलमुहर और अमलतास अलग से पहचाने जा रहे हैं. यह अवकाश और छुट्टियों का मौसम भी है और यात्राओं का भी. अभी परसों ही सप्ताह भर की लंबी यात्रा के बाद अपने घोंसले में लौटा हूँ. नीचे दिये हुए चार अनुभव शब्द चित्र अगर कुछ - कुछ कविता या कवितानुमा मान लिए जायें तो ये इसी यात्रा बीच कहीं उपजे हैं जिसकी थकान और खुमारी से मुक्त होने में थोड़ी कसर बाकी है. संदर्भ - प्रसंग इन शब्द चित्रों में ही कहीं है - अलग से उसके बारे में क्या लिखा जाय ! तो आइए देखते हैं - गरीब रथ : चार अनुभव शब्द चित्र .....

१-
गाड़ी क्रमांक : २५३५
लखनऊ से बिलासपुर - रायपुर
इधर दसहरी आम की डलिया
उधर धान का कटोरा भरपूर
यात्रा संपन्न हुई बेतरतीब
आते रहे विचार
कुछ अच्छे , कुछ सच्चे , कुछ झूठे ,कुछ अजीब
न कहीं रथ दिखा
न कहीं गरीब.

२-
दो दुनियाओं के बीच
पारदर्शी काँच की पतली कच्ची दीवार
इधर शान्त सुशीतल हवा
निरन्तर नियंत्रित तापमान
उधर धूल - धक्कड़ - अंधड़ - गुबार
फिर भी
दोनो ओर
हा - हाय - हाहाकार.

३-
जय हो !
बलिहारी ! !
क्या ग़ज़ब माया तुम्हारी -
न्यूनतम व्यय में
अधिकतम सुख की खरीददारी
जिसने भी उकेरी यह संकर संज्ञा
रखा यह कुछ भला - सा नाम
उसे नमस्ते
उस पर खीझ भरी रीझ
उसे सलाम.

४-
हमारे समय की
भाषा का
लगभग टटका तेवर
हिन्दी की नई चाल वाली बिन्दी की
चौंधभरी चंचल चमकार
अभिव्यक्ति के रीमिक्स का उदाहरण
कुछ अनूठा - तनिक लाजवाब
गोया आधी नींद - आधा जागरण
गोया आधी हकीकत - आधा ख़्वाब.

(चित्र गूगल सर्च से साभार / यात्रा के अनुभव की कुछ कड़ियाँ और ... क्रमश:....अगली पोस्ट में जारी )

10 टिप्‍पणियां:

Manish Kumar ने कहा…

हम्म्म दिलचस्प..आगे कि कड़ियों का इंतज़ार रहेगा।

Ashok Pande ने कहा…

भई बहुत सुन्दर! लौटिआए दिक्खो घर!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अति उत्तम....
नीरज

ajay kumar jha ने कहा…

aapkaa andaaje bayan dilchasp hai...mujhe bhee aglee kadiyon kaa intjaar rahegaa...

mahashakti ने कहा…

इलाहाबाद से दिल्‍ली के लिये गरीब रथ जाती है वो भी देर रात, कभी यात्रा जरूर ही करेगे :)

अनूप शुक्ल ने कहा…

सुन्दर बिम्ब। चौकस अंदाजे बयां।

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

सुन्‍दर रथ चित्रण के लिये आभार, आपके इस यात्रा के भिलाई पडाव में हम आपके साथ रहे, आपके यादों की खुशबू आज तक बरकरार है। आगे की कडियों का इंतजार रहेगा।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

चारों शब्द-चित्र हकीकत बयान कर रहे हैं।

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा…

आपके यात्रा-अनुभव के
शब्द-चित्र
या कि
गरीब-रथ की झाँकियाँ!

Arvind Mishra ने कहा…

बढियां शब्द चित्र हैं :-)