बुधवार, 31 दिसंबर 2008

आओ देखें कि दुआ कैसी हौसला क्या है !



खबर कैसी है वाकया क्या है !
मुद्दआ क्या है माजरा क्या है !

पूछो मत कि हालाते-हाजरा क्या है !
वक्त बेशर्म है हया क्या है !

बदन छलनी कलेजे पे दाग ही दाग,
इस नए साल में नया क्या है !

एक रस्मी-सी रवायत मुबारकबादों की,
वैसे इस रस्म में बुरा क्या है !

सुनते हैं उम्मीद पर कायम है जहाँ,
आओ देखें कि दुआ कैसी हौसला क्या है !

12 टिप्‍पणियां:

Arvind Mishra ने कहा…

बहुत खूब -नववर्ष की मंगल कामनाएं !

PD ने कहा…

vaah.. bahut khub.. aapki aavaj sunkar achchha laga..
aapka naya saal mangalmay ho.. :)

Amit ने कहा…

बहुत ही अच्छी कविता.....नव वर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाये

Manish Kumar ने कहा…

बदन छलनी कलेजे पे दाग ही दाग,
इस नए साल में नया क्या है !

sahi kaha aapne.achcha laga ise aapki aawaaz mein sunna naya saal aapke liye bhi mangalmay ho.

mehek ने कहा…

bahut khub

मीत ने कहा…

हौसले की दुआ की कहते हैं ?
आखि़रश आप को हुआ क्या है ?

नया साल... आने वाला हर पल मुबारक़ हो ...

कंचन सिंह चौहान ने कहा…

नये वर्ष की ढेरों शुभकामनाएं...! और नया है आपकी आवाज़ को सुनना....! बहुत गंभीर और सधी आवाज़...!

सुनते हैं उम्मीद पर कायम है जहाँ,
आओ देखें कि दुआ कैसी हौसला क्या है !

चलिये आपके साथ हम भी देखते हैं...!

विनीता यशस्वी ने कहा…

सुनते हैं उम्मीद पर कायम है जहाँ,
आओ देखें कि दुआ कैसी हौसला क्या है !

Naye saal ki dhero shubhkaanaye.

hem pandey ने कहा…

'बदन छलनी कलेजे पे दाग ही दाग,
इस नए साल में नया क्या है !

एक रस्मी-सी रवायत मुबारकबादों की,
वैसे इस रस्म में बुरा क्या है !'

- सुंदर रचना !

naveen kumar naithani ने कहा…

आज देखा
रस्म जैसी भी है गर निभाई गयी
बात रखने का ये भी सलीका तो है

हार्दिक धुभ्कामनाये

शिरीष कुमार मौर्य ने कहा…

bahut barhiya !

Parul ने कहा…

एक रस्मी-सी रवायत मुबारकबादों की,
वैसे इस रस्म में बुरा क्या है !...nav varsh ki mangalkaamnaayen...