मंगलवार, 16 सितंबर 2008

दीवानगी और दर्शन की चाहत....गायकी के दो अंदाज


( इस आवाज और इसके जादू के बारे में इतना कुछ कहा - सुना - लिखा गया है और अगले वक्तों में इतना कुछ कहा - सुना - लिखा जाएगा कि मेरे लिखे की क्या औकात.मैं तो बस इतना ही जानता हूं कि सुबह-सुबह जब यह अद्भुत स्वर मेरे भीतर उतर जाता है तब मुझे पूरे दिन भर रोजमर्रा के रंजो-गम से थोड़ी ही सही निजात -सी मिल जाती है,महसूस होता है कि संवेदनाओं की तितलियों के पर अभी पूरी तरह नुचे नहीं हैं और अंतस की जो भी टूटन - फ़ूटन तथा सीवन की उधड़न - उखड़न है उसकी मरम्मत हो रही है ,रफ़ूगरी का करिश्मा अब भी कामयाब हो रहा है.ऐसा अजगुत बहुत सारे लोगों के साथ होता रहा है,होता रहेगा , होना भी चाहिए. अब यह दीगर बात है कि कुछ लोगों की नजर में यह पलायन व पिछड़ापन माना जाता हो, व्यावहारिकता के पैमाने से बाहर और परे. परन्तु ,क्या करें साहब, 'सब कुछ सीखा हमने ना सीखी....' अब मैं अपनी बकबक बन्द करूं. मित्रों ! प्रस्तुत हैं आबिदा परवीन की गायकी के दो अंदाज.आप सुनें और अपने तरीके से आनंदित होवें )


जब से तूने मुझे दीवाना बना रक्खा है.
संग हर शख्स ने हाथों में उठा रक्खा है.

उसके दिल पर भी कड़ी इश्क में गुजरी होगी.
नाम जिसने भी मोहब्बत का सजा रक्खा है.

पत्थरों आज मेरे सर पे बरसते क्यों हो,
मैंने तुमको भी कभी अपना खुदा रक्खा है.

अब मेरी दीद की दुनिया भी तमाशाई है,
तूने क्या मुझको मोहब्बत में बना रक्खा है.

पी जा अय्याम की तल्खी को भी हंस के 'नासिर',
गम को सहने में भी कुदरत ने मजा रक्खा है.
(हकीम नासिर)

१-जब से तूने मुझे.....




२- घूंघट ओले ना लुक सजणां.......



(ऊपर लगा चित्र मेरी बेटी हिमानी ने वाटर कलर से बनाया है .हिमानी जी आठवीं कक्षा की विद्यार्थी हैं,चित्रकारी व फ़ोटोग्राफ़ी का शौक रखती हैं,कुछ कवितायें भी लिखी हैं और हां, उन्हें आबिदा आंटी के गाने अच्छे लगते हैं)


8 टिप्‍पणियां:

Parul ने कहा…

rafuugiri na ho to jaaney kya ho!!!avaaz to kamaal hai hi

डा. फीरोज़ अहमद ने कहा…

bhaut khoob .avaaz to kamaal hai hi

शिरीष कुमार मौर्य ने कहा…

हिमानी को चच्चा का प्यार !

एस. बी. सिंह ने कहा…

हजार बार ज़माना इधर से गुजरा है , मगर नई सी लगे है ऐ रहगुजर फ़िर भी।
तेरी निगाह से बचने में उम्र गुजारी है, उतर गया रगेजां में ऐ नश्तर फ़िर भी।

आबिदा जी की गायकी और आपकी पसंद के लिए फ़िराक साहब का यह शेर मौजूं है।

ललितमोहन त्रिवेदी ने कहा…

' बलिहारी गुरु आपकी जो गोविन्द दियो मिलाय ' आबिदा जी तो हैं ही पर सिद्ध तो सिद्धेश्वर जी ही हैं जो प्यास को और बढ़ाते ही जा रहे हैं ! जाने कितने रत्न सहेज रखे है ! हो सके तो कल्पना जी की Rasiya- A-Cascade of love की कुछ बंदिशें सुनवाइएगा ! आपकी पसंद मनोहारी है !

Mrs. Asha Joglekar ने कहा…

वाह !

RA ने कहा…

आपकी बिटिया हिमानी की कृति सुंदर है और उसका musical taste भी क्या खूब !! हम सबका स्नेह आशीष उसे प्रेषित है |

जोशिम ने कहा…

होनहार बिरबान के ..