रविवार, 1 दिसंबर 2013

महान प्रेम : अन्ना स्विर

पोलिश कवि अन्ना स्विर की कुछ कविताओं के अनुवाद इस ठिकाने पर आप पहले भी पढ़ चुके हैं। आइए , आज साझा करते हैं उनकी एक और कविता जो  अपने कलेवर और  अपनी काया  में बहुत  छोटी है , लघु है लेकिन  मुझे लगता है  कि इसका अंतरंग बहुत गहरा है ....


अन्ना स्विर की कविता
महान प्रेम

वह साठ बरस की है
वह जिए जा रही है
अपने जीवन का महान प्रेम।

वह गलबहियां डाले
टहल रही है
अपने प्रियतम संग
हवा में लहरा रहे हैं उसके केश
कहता है उसका प्रियतम :
'मोतियों की तरह हैं तुम्हारे केश'।

उनके बच्चे कहते है :
'बेवकूफ बूढ़े़'।
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(अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह  / पेंटिंग : जोआन ब्रेकवोल्ड   की  कृति  'ओल्ड कपल ' , गूगल छवि से साभार)

4 टिप्‍पणियां:

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

सुंदर !

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज सोमवार (02-112-2013) को "कुछ तो मजबूरी होगी" (चर्चा मंचःअंक-1449)
पर भी है!
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया ने कहा…

सुंदर उत्कृष्ट रचना ....!
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नई पोस्ट-: चुनाव आया...

Onkar ने कहा…

वाह, बहुत खूब