बुधवार, 5 मई 2010

गुनगुनी बारिशें


If you are the forest of the clouds
I am the axe that parts it
- Octavio Paz

....... जिन चीजों में मन रमता है उनमें कविता का स्थान सबसे महत्वपूर्ण है. दुनिया जहान की कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि कितना - कितना कहा जा चुका है और कितना - कितना बाकी है फिर भी कविता की संभावना निरंतर है और वह कभी खत्म नहीं होगी . आज और अभी इस अधियायी रात के एकांत में १९९० के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित कवि आक्तावियो पाज़ ( ३१ मार्च १९१४ – १९ अप्रेल १९९८ ) की दो छोटी छोटी कवितायें प्रस्तुत हैं...



दो कवितायें : आक्तावियो पाज़
( अनुवाद : सिद्धेश्वर सिंह )

* स्पर्श

मेरे हाथ
खोलते हैं तुम्हारे अस्तित्व के पर्दे।
पहनाते हैं
नग्नता से परे का परिधान।
उघाड़ते हैं
तुम्हारी देह के भीतर की देहमालायें।
मेरे हाथ
अविष्कार करते हैं
तुम्हारी देह के लिए
एक दूसरी देह।

** संयोग

मेरे नेत्र
खोज करते है
तुम्हारी निर्वसनता
और उसे आच्छादित कर देते हैं
दृष्टि की
गुनगुनी बारिशों से।

4 टिप्‍पणियां:

निर्मला कपिला ने कहा…

अनुवाद और कवितायें बहुत सुन्दर हैं धन्यवाद्

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक ने कहा…

अनुवाद!
और वह भी इतना सहज, सरल और बोधगम्य शब्दों के साथ!
डॉ. साहिब!
आपकी लेखनी को नमन!

Udan Tashtari ने कहा…

दोनों कवियायें और उनका अनुवाद उम्दा है.

girirajk ने कहा…

bahut sundar anuvaad hain. aur kar rahe hain?