रविवार, 1 जून 2008

मोबाईल

सुबह उठा
कोई कविता पढी
सुना पसंदीदा संगीत

दिन भर के युद्ध के लिए
चार्ज हुई बैटरी।

आज रंग है री...
मेरे मौला!
यूं ही चलाए राखियो
अपनी कम्पनी की बैटरी
बै

री
ताकि कानॊं में
रोज बाबा खुसरो कहते रहें -आज रंग है री..

2 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

मेरे मौला!
यूं ही चलाए राखियो
अपनी कम्पनी की बैटरी


--सब इसी प्रार्थना मे जुटे है. बहुत सही.

Priyankar ने कहा…

हम भी यहां बैटरी रीचार्ज़ करने ही तो आते हैं .